xmlns:og='http://ogp.me/ns#' Aaj hai Sawan ki Shivratri

Aaj hai Sawan ki Shivratri

इस बार बिना कावड़ बोल बम 

Aaj hai Sawan ki Shivratri
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आज सावन की शिवरात्रि है। इस शिवरात्रि को कावड़ यात्रा का समापन दिवस भी कहा जाता है। हरिद्वार गोमुख व गंगोत्री जैसे स्थानों से गंगाजल लाकर शिवलिंग को अर्पित करने की परंपरा है। इस बार कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध के कारण यह परंपरा निभाना भले मुमकिन ना हो, लेकिन भोलेनाथ को तो भावना से प्रसन्न किया जा सकता है। 

वैसे तो हर महीने शिवरात्रि का व्रत रखकर भोले बाबा की पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन सावन की शिवरात्रि और फाल्गुन मास में पढ़ने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना के साथ जलाभिषेक करने से वह जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। 

गंगाजल से अभिषेक करना बहुत ही पुन्य कार्य माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करते हैं, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है। खासतौर पर जिन कन्याओं के विवाह में समस्या आ रही हो, उन्हें यह व्रत करना चाहिए।

ऐसे करें अभिषेक 

शिवलिंग पर पंचामृत, दूध,दही,शहद,गहि,शर्करा,गंगा जल,बेल पत्र,कनेर,धतूरा,कमलगट्टा, गुलाब और निल कमल चढ़ाकर अभिषेक करना चाहिए। 

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप जलाए। अगर घर में शिवलिंग  है तो उसका भी गंगा जल अभिषेक करें। गंगा  होने  साफ़ पानी से भी भोले बाबा का अभिषेक क्र सकते है। घर में शिवलिंग नहीं है। भोले बाबा का ध्यान करें। भगवान शिव की आरती करें। माता पार्वती की आरती भी करें। अपनी इच्छा अनुसार भगवान शंकर को पति आहार का भोग लगाएं। भोग में कुछ मीठा भी शामिल करें। पूरा दिन व्रत कर शाम को भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करने के साथ आरती गएँ। 

सोमवती अमावस्या पितरों, प्रकृति का आभार 

कल सावन की हरियाली अमावस्या है, दिन सोमवार है इसलिए इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा और इसका महत्व भी ज्यादा माना जाएगा। प्रत्येक अमावस्या की तरह श्रावणी अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए पिंडदान और दान-धर्म करने का महत्व है। इसके अलावा वृक्षों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी दिन है। इस दिन गंगा जल से स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें। श्रावणी अमावस्या का उपवास भी किया जाता है। किसी गरीब को दान दक्षिणा दें। श्रावणी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विधान है। इस दिन पीपल, बरगद, केले, नीबू अथवा तुलसी के पौधे का रोपण करें। मछलियों को आटे की गोलियां और चीटियों को चीनी या सूखा आटा खिलाना भी पुण्यदायी माना जाता है।

हरियाली तीज शिव-शक्ति के पुनर्मिलन का पर्व 

भगवान शिव और माता पार्वती के पूर्ण मिलन का पर्व हरियाली तीज इस बार 23 जुलाई को मनाया जाएगा। सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाए जाने वाले इस पर्व को कुछ जगह कजली तीज भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या के बाद श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भी भगवान शंकर ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए इस दिन महिलाएं व्रत रखकर मां पार्वती और भोलेनाथ की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र व सौभाग्य की प्रार्थना करती है। नए कपड़े, श्रृंगार, झूला, मेहंदी भी इस पर्व से जुड़े हैं। मेहंदी सिर्फ श्रृंगार तक सीमित नहीं है। इसका औषधीय और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इसे हाथों, पैरों पर लगाने से जहां तन को शीतलता महसूस होती है। वहीं मान्यता है कि बुध और शुक्र ग्रह को बल मिलता है। इससे मन शांत रहता है, दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है।

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