xmlns:og='http://ogp.me/ns#' टैक्स का अब 'फसलेस' आकलन, करदाता चार्टर लागु

टैक्स का अब 'फसलेस' आकलन, करदाता चार्टर लागु

टैक्स का अब 'फसलेस' आकलन, करदाता चार्टर लागु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अगस्त को कर व्यवस्था में बड़े सुधारों का ऐलान करते हुए कहा कि अब टैक्स रिटर्न का 'फेसलेस' आकलन होगा। इसमें करदाताओं और कर अधिकारियों को एक दूसरे से मिलने अथवा पहचान रखने की जरूरत नहीं होगी। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और अधिकारियों के जरूरत से अधिक दखल पर अंकुश लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी कर वरिष्ठ परिवेश सुनिश्चित करने के लिए करदाता चार्टर (अधिकार पत्र) लागू किये जाने की भी घोषणा की है। 

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'पारदर्शी कराधान इमानदार का सम्मान' मंच की शुरुआत की। इसे 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की नई व्यवस्था बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें फेसलेस एसेसमेंट, फेसलेस अपील और करदाता चार्टर जैसे बड़े कर सुधार किए हैं। फेसलेस आकलन के तहत करदाताओं को आयकर दफ्तर के चक्कर लगाने या अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं होगी। वही, करदाता चार्टर कर अधिकारियों और करदाताओं के कर्तव्यों तथा अधिकारों को निर्धारित करता है। यह दोनों सुधार 13 अगस्त से अमल में आ गये, जबकि फेसलेस अपील का प्रावधान 25 सितंबर से लागू होगा।  

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब टैक्स जांच के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास उचक रूप से आबंटित किया जाएगा। जैसे मुंबई के किसी करदाता के रिटर्न से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो इसकी छानबीन का जिम्मा अब मुंबई के बजाय चेन्नई की फेसलेस टीम के पास जा सकता है। यह पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत होगी। 

विनम्र व्यवहार का भरोसा 

करदाता चार्टर में व्यवस्था दी गई है कि कर विभाग प्रत्येक करदाता के साथ निष्पक्ष और विनम्र व्यवहार रखते हुए उपयुक्त सेवाएं उपलब्ध कराएगा। आयकर विभाग को अब करदाताओं के गौरव का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा। करदाता की बात पर विश्वास करना होगा। वहीं, यह भी उपेक्षा की गई है कि करदाता समय पर कर का भुगतान करेंगे, इमानदार रहेंगे और नियमों का पालन करेंगे।  

आगे आने का आवाहन 

प्रधानमंत्री ने कहा 'बीते 6 से 7 साल में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में करीब ढाई करोड़ की वृद्धि हुई है।  लेकिन यह भी सही है कि 130 करोड़ के देश में यह बहुत कम है। इतने बड़े देश में सिर्फ डेढ़ करोड़ साथी ही इनकम टैक्स जमा करते हैं देश को आत्मचिंतन करना होगा जो टैक्स देने में सक्षम है वह खुद आगे आएं।' 

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