xmlns:og='http://ogp.me/ns#' Sharadh Aur Navratra Mein Ek Maah Ka Antraal

Sharadh Aur Navratra Mein Ek Maah Ka Antraal

Sharadh Aur Navratra Mein Ek Maah Ka Antraal
Image by- Patrika.com


160 साल बाद ऐसा हो रहा है कि पितृ पक्ष खत्म होने के अगले दिन नवरात्र शुरू नहीं होंगे। इस बार पूर्णिमा का श्राद्ध 1 सितंबर को है। पितृ पक्ष का समापन 17 सितंबर को होगा। इसके अगले दिन नवरात्र के बजाय अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। नवरात्रि का पावन पर्व पितृ पक्ष के 1 महीने बाद 17 अक्टूबर से शुरू होगा।  दरअसल, लीप वर्ष और अधिकमास साथ होने के कारण इस बार चातुर्मास 4 के बजाय 5 महीने का है। वही, अधिकमास 2 महीने का है। चातुर्मास देवउठनी के दिन 25 नवंबर को समाप्त होंगे। 

पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। यहां श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है। हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से अशिवन अमावस्या तक का काल पितृ पक्ष कहलाता है। 

किस तारीख पर करना चाहिए श्राद्ध 

सरल शब्दों में समझा जाए तो श्राद्ध दिवंगत परिजनों को उनकी मृत्यु की तिथि पर श्रद्धा पूर्वक याद किया जाना है।  अगर किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा हो को हुई हो, तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के दिन ही किया जाता है। इसी प्रकार अन्य दिनों में भी ऐसा ही किया जाता है। इस विषय में कुछ विशेष मान्यताएं हैं--

  • पिता का श्राद्ध अष्टमी के दिन और माता का नवमी के दिन किया जाता है। 


  • जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई हो, यानी किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण जान गई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। 


  • साधु-संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है। 


  • जिन पितरों की मृत्यु की तिथि याद ना हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाता है। इस दिन को सर्व पितृ श्राद्ध कहा जाता है। 


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